Frog Strange Habit: दुनिया में कई अजीबोगरीब प्राणी हैं। लेकिन मेंढक एक ऐसा प्राणी है जो खाने को निगलने में आंखों का भी इस्तेमाल करता है। दरअसल, मेंढक अपने खाने को चबा नहीं पाता है और सीधे निगलने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया में आंखें भी उसकी मदद करती हैं। मेंढक का यह अनूठा 'आंखों से निगलने' वाला मैकेनिज्म महज एक रोचक तथ्य नहीं, बल्कि एक विकसित जैविक अनुकूलन यानी Adaptation है। मेंढक के शरीर की बनावट इसको समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जानें मेंढक के शरीर की बनावट का इसमें क्या रोल होता है।
आंखों का अंदर जाना है खास प्रक्रिया का हिस्सा
जब कोई मेंढक बड़ा शिकार जैसे- कीड़ा या झींगुर पकड़ता है, तो वह उसे निगलते वक्त अपनी आंखों को सॉकेट से नीचे यानी मुंह के अंदर की ओर खींच लेता है।
आंखों की मदद से ग्रासनली की ओर ढकेलता है भोजन
मेंढक मुंह के अंदर गई आंखें असल में शिकार को ग्रासनली की तरफ धकेलने में सहायता करती हैं।
सख्त हड्डी की जगह होते हैं लचीले ऊतक
मेंढक के सिर के ऊपरी हिस्से और आंखों के बीच सख्त हड्डी नहीं होती है। हड्डी की जगह वहां लचीले ऊतक होते हैं, जिससे मेंढक अपनी आंखों को मुंह के अंदर धंसा पाता है।
जीभ की बनावट के कारण निकलने में होती है दिक्कत
मेंढक की जीभ की बनावट भी अलग होती है। वह मुंह के आगे वाले भाग से जुड़ी होती है। इस वजह से वो शिकार पकड़ने के लिए बेहतरीन होती है, लेकिन उसे गले में धकेलने में कम सक्षम होती हैं।
मेंढक में ना के बराबर होती है चबाने की क्षमता
मेंढक में भोजन को चबाते की क्षमता नहीं होती है, वे उसे पूरा साबूत ही निगल लेता है। वहीं, मेंढक की उभरी हुई आंखें उन्हें 360 डिग्री का व्यू देती हैं और शिकार को निगलने में 'धक्का' देकर यांत्रिक सहायता करती हैं।